स्वयं से मिलन

यह ब्लॉग मैं कई दिनों से लिखना चाहती थी| बल्कि यह कहूँ की इस ब्लॉग में लिखी कोई भी बात काल्पनिक नहीं है, सभी बातें सत्य घटना है | यह किसी एक विषय पर नहीं बल्कि रोज़ाना जो बातें हम सुनते है, पढ़ते हैं, जिन्हे हम ज़्यादा तवज्जो नहीं देते उनके बारे में है |

कुछ दिन पहले एक रिश्तेदार को बात करते सुना | वो कह रही थीं की वो अपने २ साल के बेटे से केवल अंग्रेजी में बात करती हैं| सारे कार्टून भी अंग्रेजी में दिखाती हैं | और उनके बोलने के लहजे में हिंदी के प्रति एक हीन भावना थी जैसे कि वो चाहती ही नहीं उनका बेटा हिंदी जाने | चलो कार्टून तो हिंदी में dubbed न ही दिखाएँ तो अच्छा है लेकिन ये सोच कि उनका बेटा बचपन से ही अंग्रेजी सीखे ये भी तो ठीक नहीं | मेरा यह मानना है कि कोई भी भाषा बुरी नहीं होती | अंग्रेजी भी बुरी नहीं है | नयी भाषा सीखनी चाहिए लेकिन किसी और भाषा, वो भी अपनी मातृभाषा का तिरस्कार तो ठीक नहीं |

अंग्रेज़ों ने हम पर राज किया | उन्होंने ऐसे ही राज नहीं किया | उन्होंने हमारे अंदर अपनी ही संस्कृति और स्वर्णिम इतिहास के प्रति हीन भावना पैदा कर दी थी | स्वयं को westernized करने कि सब में होड़ पैदा कर दी थी | जैसा कि बड़े बूढ़े कहते हैं अँगरेज़ चले गए लेकिन अंग्रेजी छोड़ गए, इस कहावत का सबसे बड़ा सच यह भी है कि अंग्रेज़ों से तो हमने स्वतंत्रता ले ली लेकिन स्वयं को उस हीनता की सोच के पराधीन कर दिया |

अपने cousin भाई से कई दिनों बाद मिली | उसका एक ही प्रश्न था : क्या मेरा कोई बॉयफ्रेंड है? मेरे बार बार मना करने के बावजूद वो आश्चर्य से यही पूछता रहा कि मेरा कभी कोई बॉयफ्रेंड नहीं रहा? मेरा जवाब फिर भी वही था| उसके इस लहजे से ये लगा कि अगर किसी का कोई बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड नहीं हो तो वो आज के समाज में cool नहीं | किसी को यदि शब्दों के उलटे अर्थ न पता हो तो भी वो पिछड़ा माना जायेगा |

जब मैं स्कूल में थी तो इंग्लिश मीडियम और हिंदी मीडियम के बच्चों में बेफाल्तू कि तुलना होती थी | कोई भी थोड़ा देसी या भारी हिंदी में बात करले तो उससे HMT कह कर चिढ़ाया जाता था | तब तो मुझे समझ नहीं आया क्यूंकि मैं खुद इंग्लिश मीडियम से पढ़ी हूँ और उस दौर से गुज़र चुकी हूँ क्योंकि हिंदी से मुझे हमेशा से लगाव था | लेकिन वो हीन भावना जो मेरे भीतर जगाने कि कोशिश की गयी उसका अर्थ मैं आज समझ पा रही हूँ |

आज भी अगर मैं हिंदी में बोलती हूँ या लिखती हूँ तो मेरे कई cousin और कई सहपाठी यही कहते हैं कि ‘तुम हिंदी अब तक जानती हो? हमसे तो हिंदी में लिखा ही नहीं जाता |’ मेरा एक ही उत्तर रहता हैं कि फिर तो तुम्हे शर्म आनी चाहिए | अगर मैं अपने धर्म या संस्कृति के बारे में उनसे बात करूँ तो यही सुन ने को मिलता हैं कि वो बड़े बूढ़ों के लिए हैं | ये बातें एक उम्र के बाद अच्छी लगती हैं | यदि मैं किसी धार्मिक स्थल पे जाऊं तो कहते हैं कि बुढ़ापे में क्या करेगी फिर | हर चीज़ के प्रति हमने एक छवि बना ली हैं और हम समझते हैं कि हम westernized हो गए हैं | और ये मैंने भारत में रहने वाले भारतियों में ज़्यादा देखा है | विदेश में रहने वाले एक रिश्तेदार के बच्चों को संस्कृत श्लोक आते हैं लेकिन भारत में रहने वाले कई रिश्तेदारों को संस्कृत में न बोलना coolness लगती है |

एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक विदेशी मेहमान को मैंने ‘Hi’ कहके सम्बोधित किया लेकिन उसने मुझे नमस्ते कहा | मुझे शर्म आई | कुछ दिनों बाद एक रिश्तेदार को मैंने हाथ जोड़के प्रणाम किया तो उन्होंने मुझे ‘Hi’ बेटा कहा | उस समय मुझे हंसी आई और खुद पर गर्व भी हुआ | लेकिन समझ नहीं पायी कि तब गलत थी या अब गलत हूँ | जब कोई विदेशी हिंदी या संस्कृत में बात करते है तो हम  ‘वाह वाह’ करते नहीं थकते तो हम स्वयं ही अपनी संस्कृति पर शर्म क्यों करते हैं? या तो हम तब ढोंग कर रहे थे या अब ढोंग कर रहे हैं |

हमारा हाल ऐसा है कि न तो हम पूरे भारतीय हो पाये और न ही पूरे western | बीच में लटके हुए हम दो नावों पर सवार है |

ऐसा नहीं है कि मैं कभी इस हीन भावना से नहीं गुज़री | एक समय था जब मैं भी समझती थी कि हिंदी जानना मेरी कमज़ोरी है | मुझे अंग्रेजी अच्छे से क्यों नहीं आती? मुझे नहीं जानना गीता और रामायण के बारे में क्योंकि ये cool नहीं | मैं किसी को नमस्ते करने में शर्म महसूस करती थी | लेकिन अब मैं इस हीन भाव वाली स्थिति से बाहर आ रही हूँ | पूरी तरह नहीं आई लेकिन कोशिश जारी है | अपनी भाषा और संस्कृति को समझने की कोशिश जारी है | अपने स्वर्णिम इतिहास और सनातन धर्म को जानने की कोशिश जारी है | स्वयं से प्रेम करने की कोशिश जारी है | स्वयं पर गर्व करने की कोशिश जारी है | स्वयं से मिलन की कोशिश जारी है |

हर हर महादेव 🙂

11 thoughts on “स्वयं से मिलन

  1. Very impressive and nice thoughts. ..may the glory of Hindi be revived by youngsters like u….

  2. धन्यवाद भुआ दादी| मुझे ख़ुशी हुई कि आपने मेरी भावनाओं को समझा | मुझे गर्व है कि आपको मुझ पर गर्व है | 🙂
    राम राम

  3. अनुश्री ,बहुत सुन्दर सटीक भावनाये लिखी।मुझे तुम पर गर्व है।राम राम

  4. Yes.. the language will survive as long as it is used. It has survived thousands of years and is still evolving.

  5. Thanks Harshina. And it goes with every language. Each culture is beautiful in it own way. And we should respect all but not at cost of insulting and neglecting our own. 🙂

  6. Thank you. I agree with language flexibility thing. And about hindi, well we have developed a jugaad in form of Hinglish which will definitely stay for a long time to come. 😀

    Indian culture has been very open. Everyone has right to express and absorb the way they want. but as the time passed we thought have made it subject to many things. Lets hope we can revive its glory.

  7. Hi Anu, good to see you here. I would agree with some things that you say. Of course, there is an inferiority complex to be known by our roots. But, what is the reason for that. Its because, someone else laughs at you or teases you. Also, before the Britishers came in, Indians didnt have much of gender discrimination. and in fact, females had every right to express themselves or do as they want. We have examples of women rulers and fighters in the past, culture of swayamwar, etc. But it is the British culture which says that females are inferior and should be protected. But unfortunately that has stayed with us. Also, the repression of sexuality is also a western culture. It was not a taboo subject for us Indians. see the Khajuraho temple or the Kamasutra.

    A language which is not flexible will die inevitably. But a language that assimilates will last forever. English is one. Hopefully, Hindi will also be flexible to take in new words. Languages like Sanskrit, Latin died due to non-flexibility. But these languages dissolve and are hidden in the new languages like Hindi, English, French.

    It was a good article and I am glad to see a Hindi blog to be honest.

  8. o behna hum dono ek hi ped ke patte hain, sahi kahaa hindi ho ya koi bhi matrubhaasha, sabko ek samaan darja dena chahiye !! I'm trying my level best to convey, i hope i did so ! Completely agree wid u !!

  9. What you said is one way to look at things. There's a different way to look at it too.

    English language is seen by SC/ST etc to help them climb up the social and economic ladder.

    It's not possible to get by in today's world without English. Even to communicate with people in other Indian states, you need to know either the local language or English. Since you cannot learn multiple Indian languages, English has to be used as the link language.
    English increases the Dalit youths' chances of getting into institutes of higher education and improve their employment prospects.

    Ambedkar said English was the milk of a lioness, he said only those who drink it will roar.

  10. As I have mentioned in the blog itself that I am not against any language, even I speak, chat, write, tweet in English. Every language is beautiful as it is a way to communicate and express. But feeling disgusted for your mother tongue and seeing it as something of less importance is not correct in my opinion. English is a common language even among Inter-state conversations in India and I am not against it. And also people who know Hindi but just to show themselves cool pretend of not knowing it or making fun of it.

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